दाम्पत्य जीवन और सप्तम भाव

सप्तम भाव से स्त्री एवं विवाह सुख,‍ पति और पत्नी  का विचार, वैवाहिक सुख, साझेदारी के कार्य, व्यापार में हानि, लाभ, वाद-विवाद, मुकदमा, कलह, प्रवास, छोटे भाई-बहनों की संतानें, यात्रा तथा जननेन्द्रिय संबंधी गुप्त रोगों का विचार करना चाहिए।


यहाँ  हम दाम्पत्य जीवन के संदर्भ में  विचार करते हैं कि शादी सही समय पर होगी या नही , कितनी शादिया होगी और विवाहिक जीवन कैसा रहेगा इन सभी प्रश्नों सप्तम भाव की अहम भूमिका होती है। 


जन्म  कुंडली में सप्तम भाव ज्योतिषीय दृष्टि से दाम्पत्य जीवन  की जानकारी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। कुंडली में सप्तम भाव विवाह व विवाह के बाद पति व पत्नी के बीच जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित होता है। 



  • जन्म कुंडली के सप्तम भाव में चंद्रमा हो तो जीवन साथी  का स्वभाव मधुर होता है।आकृषक व्यक्तित्व और वस्त्र,आभूषण पहनने का शौक होता है।

  •  जन्म कुंडली के सप्तम भाव में मंगल हो तो दाम्पत्य जीवन क्लेश पूर्ण  कोई न कोई कष्ट लगा रहता है अचानक बुरी घटनाएं ज्यादा सामने आती हैं।कभी कभी बुरे लोगों की संगत  होती है।सामने वाला व्यभिचार की ओर जा सकता है। 

  •  सूर्य सप्तम भाव में हो स्वभाव में अहं की मात्रा बढ़ती जीवन साथी क्रोधी होता है और उसको विषम बिमारियां  होती हैं 

  •  बुध सप्तम भाव में हो तो जीवन साथी मिलनसार बच्चो की तरह हरकते करने वाला ,अपना कार्य करवाने में निपुण ,वक्ता ,प्रिय वाणी बोलने वाला बुद्धिमान होगा या होगी। 

  • सप्तम स्थान में गुरु ग्रह होने पर जीवन साथी धार्मिक, विद्वान, बुजुर्गों की तरह व्यवहारी,सही सलाह कार ,धनवान,गुणों से युक्त होगा या होगी। 

  • इस स्थान में शुक्र होने पर स्त्री को धनवान,सुंदर पति मिलता है।

  • सप्तम स्थान में शनि होने पर जीवन साथी दुष्टता पूर्ण के व्यवहार  से युक्त ,एक दूसरे को नीचे दिखने वाले  होंगे और उच्च का शनि हो तो जीवन साथी अपने परिवार से धनवान,गुणवान होगा और अपने निज बल से आय के स्रोत को प्राप्त करता है। 

  •  सप्तम भाव में राहु या केतु हो तो दाम्पत्य जीवन में दुख  और कोई न कोई कष्ट रहता है और दाम्पत्य सुख भी काम करता है। अनावश्यक विवाद विवाह में देरी ,तथा विवाह तय होने पर भी विघ्न कर विवाह भांग करता है। यदि यह भाव किसी पापी ग्रह शनि और मंगल द्वारा दृष्ट हो विवाह नहीं होता। 

  •  जन्म कुंडली में सप्तम भाव से उसके ससुराल की दूरी के बारे में भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • अगर सप्तम भाव में वृष,सिंह,वृश्चिक या कुंभ राशि स्थित हो तो लडकी की शादी उसके जन्म स्थान से 90 किलोमीटर के अंदर ही होगी।चार राशि मेष ,कर्क ,तुला ,मकर राशि हो तो लगभग २०० कि० मि० के अंदर विवाह होगा। यदि विषम राशि ३,६,९,१२ हो तो विवाह ८० से १०० किलोमीटर मध्य विवाह हो सकता है। सप्तमेश सप्तम भाव से बारहवें भाव के मध्य हो जीवन साथी दुसरे राज्य या विदेश में निवास करता है। 

  • यदि सप्तम भाव में चंद्र,शुक्रव गुरू हो तो लडकी का विवाह उसके जन्म स्थान के समीप ही होगा।

  • यदि किसी लडकी की कुंडली में बुध स्वराषि मिथुन व कन्या का होकर सप्तम भाव में बैठा हो तो विवाह बाल्यावस्था में ही होगा।

  • चंद्रमा अगर सप्तमेष होकर पापी ग्रह से प्रभावित हो तो विवाह 22 वर्ष की आयु में होगा।

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर सप्तम भाव में या सप्तम भाव पर चंद्रमा,बुध,गुरू या शुक्र का प्रभाव हो तो लडकी का पति लगभग दो से चार वर्ष के अंतर से बडा होगा और सुंदर भी होगा।

  • लेकिन अगर इस भाव में या भाव पर सूर्य,मंगल,शनि,राहु व केतु का प्रभाव हो तो बडी आयु या लडकी की उम्र से 5 वर्ष बडा होगा।